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इतिहास

वर्तमान तुएनसांग जिले वाला क्षेत्र आजादी से पहले के दिनों में पूरी तरह से बिना किसी प्रशासनिक व्यवस्था के था। अंग्रेजों ने इसे 'एक्सक्लूडेड एरिया' (वर्जित क्षेत्र) घोषित कर रखा था। यहाँ के लोगों का बाहरी दुनिया से लगभग कोई संपर्क नहीं था। 'हेड हंटिंग' (दुश्मनों के सिर काटकर ले जाने की प्रथा) और अन्य आदिम प्रथाएं यहाँ आम थीं; असल में, अक्टूबर 1963 में भी इस जिले के पानसो (Panso) इलाके में 'हेड हंटिंग' का एक मामला सामने आया था। 1948 में, पहली बार तुएनसांग में एक प्रशासनिक केंद्र स्थापित किया गया। वहीं 1945 में, इस क्षेत्र (जिसमें आज के मोन, लोंगलेंग और किफिरे जिले भी शामिल हैं) को 'नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी' (NEFA) के अंतर्गत 'तुएनसांग फ्रंटियर डिवीजन' के रूप में शामिल कर लिया गया था।
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स्थान और पर्यटन

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